संचार का अर्थ व परिभाषाएं Definitions and meaning of communication
संचार का अर्थ व परिभाषाएं
डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज
दो या दो से अधिक व्यक्ति आपस में कुछ सार्थक चिह्नों, संकेतों या प्रतीकों के माध्यम से विचारों या भावनाओं का आदान-प्रदान करते हैं तो उसे संचार कहते हैं।
ऑक्सफोर्ड
डिक्शनरी के अनुसार- विचारों, जानकारी वगैरह का विनिमय, किसी और तक पहुंचाना
या बांटना, चाहे वह लिखित, मौखिक या सांकेतिक
हो,
संचार
है।
चार्ल्स
ई. ऑसगुड के अनुसार- आम तौर पर संचार तब होता है, जब एक सिस्टम या स्रोत
किसी दूसरे या गंतव्य को विभिन्न प्रकार के संकेतों के माध्यम से प्रभावित करें ।
जोसेफ डिनिटी - “जनसंचार बहुत से व्यक्ति में एक मशीन के माध्यम से सूचनाओं, विचारों और दृष्टिकोणों को रूपांतरित करने की प्रक्रिया है।”
डी.एस. मेहता - “जनसंचार
का अर्थ है जन संचार माध्यमों - जैसे रेडियो, दूरदर्शन,
प्रेस
और चलचित्र द्वारा सूचना, विचार और
मनोरंजन का प्रचार-प्रसार करना।”
जार्ज ए. मिलर - “जनसंचार
का अर्थ सूचना को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना है।”
जवरीमल्ल पारेख - “जनसंचार
का अर्थ है जन के लिए संचार के माध्यम।
टीड - का कहना है कि संचार का लक्ष्य समान विषयों
पर मस्तिष्क को में मेल स्थापित करना है।
लारेंस ए एप्ली - के अनुसार संचार वह प्रक्रिया है
- जिससे एक व्यक्ति अपने विचारों से दूसरे को अवगत कराता है।
थियो हेमन - का कथन है कि एक व्यक्ति से दूसरे की
संरचनाएँ एवं समझ हस्तांतरित करने की प्रक्रिया संचार है।
एफ.जी.मेयर - के अनुसार माननीय विचारों और
सम्मतियों का शब्दों, पन्नों एवं संदेशों के
जरिए आदान प्रदान संचार है।
लुईस
ए. एलेन के अनुसार- संचार उन सभी क्रियाओं का योग है जिनके द्वारा एक व्यक्ति
दूसरे के साथ समझदारी स्थापित करना चाहता है। संचार अर्थों का एक पुल है। इसमें
कहने,
सुनने
और समझने की एक व्यवस्थित तथा नियमित प्रक्रिया शामिल है। संचार से तात्पर्य उन
समस्त तरीकों से है, जिनको एक व्यक्ति अपनी विचारधारा को दूसरे व्यक्ति की मस्तिष्क
में डालने या समझाने के लिए अपनाता है। यह वास्तव में दो व्यक्तियों के मस्तिष्क
के बीच की खाई को पाटने वाला सेतु है। इसके अंतर्गत् कहने, सुनने तथा समझने की एक
वैज्ञानिक प्रक्रिया सदैव चालू रहती है।
मैकडेविड और हरारी के अनुसार- मनोवैज्ञानिक दृष्टि से संचार से तात्पर्य व्यक्तियों के बीच विचारों और अभिव्यक्तियों के आदान-प्रदान से है।
कैथ डैविस के अनुसार- एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को सूचना भेजने तथा समझने की विधि है। यह आवश्यक तौर पर लोगों में अर्थ का एक पुल है। पुल का प्रयोग करके एक व्यक्ति आराम से गलत समझने की नदी को पार कर सकता है।
क्रच
एवं साथियों के अनुसार- किसी वस्तु के विषय में समान या सहभागी ज्ञान की प्राप्ति
के लिए प्रतीकों का उपयोग ही संचार है। यद्यपि मनुष्यों में संचार का महत्वपूर्ण
माध्यम भाषा ही है, फिर भी अन्य प्रतीकों का प्रयोग हो सकता है।
चेरी
के अनुसार संचार उत्प्रेरक का अदान-प्रदान है ।
शैनन
ने संचार को परिभाषित करते हुए कहा है कि एक मस्तिक का दूसरे मस्तिक पर प्रभाव है
।
मिलेन
ने संचार को प्रशासनिक दृष्टिकोण से परिभाषित किया है । आपके अनुसार, संचार प्रशासनिक
संगठन की जीवन-रेखा है ।
डा.
श्यामारचरण के शब्दों में :- संचार सामाजीकरण का प्रमुख माध्यम है। संचार द्वारा
सामाजिक और सांस्कृतिक परम्पराएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचती हैं ।
सामाजीकरण की प्रत्येक स्थिति और उसका हर रूप संचार पर आश्रित है। मनुष्य जैविकीय
प्राणी से सामाजिक प्राणी तब बनता है, जब वह संचार द्वारा सांस्कृतिक अभिवृत्तियों, मूल्यों और व्यवहार-प्रकारों
को आत्मसात कर लेता है।
वीवर
के अनुसार,
वे
सभी तरीके जिनके द्वारा एक मानव दूसरे को प्रभावित कर सकता है, संचार के अन्तर्गत
आते है ।
न्यूमैन
एवं समर के दृष्टिकोण में, संचार दा या दो से अधिक व्यक्तियों के तथ्यों, विचारों तथा
भावनाओं का पारस्परिक अदान-प्रदान है ।
विल्वर
के अनुसार संचार एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा स्रोत से श्रोता तक सन्देश
पहुँचता है।
किसी भी सूचना, विचार
या भाव को दूसरों तक पहुँचाना ही मोटे तौर पर संचार या कम्युनिकेशन कहलाता है। एक
साथ लाखों-करोड़ों लोगों तक एक सूचना को पहुँचाना ही संचार या जनसंचार या मास
कम्युनिकेशन मीडिया कहलाता है। मानव सभ्यवा के विकास में संचार की महत्वपूर्ण
भूमिका रही है। वैसे तो सभ्यता के विकास के साथ ही मुनष्य किसी न किसी रूप में
संचार करता रहा है।
जब आज की तरह टेलीफोन, इंटरनेट
आदि की सुविधाएं नहीं थी, तब लोग
चिट्ठी लिख कर अपना हाल-समाचार लोगों तक पहुँचाते और दूसरे का समाचार जानते थे।
आपको यह जान कर हैरानी होगी कि चिट्ठी लिखने का प्रचलन भी बहुत पुराना नही है। जब
डाक व्यवस्था नहीं थी तब लोग संदेश भेजने वालों जिन्हें संवदिया कहा जाता था,
के
माध्यम से एक गांव से दूसरे गांव तक संदेश भेजते या मंगाते थे।
पुराने समय में राजा के हरकारे पैदल या घोड़े की
सवारी करते हुए राजा के संदेश राजधानी से दूसरी जगहों पर ले जाते और वहां से ले
आते थे। आपने यह भी कई कहानियों में सुना होगा कि लोग कबूतरों के जरिए अपना संदेश
भेजा करते थे। यही व्यवस्था बाद में एक सरकारी विभाग डाक-विभाग-बनाकर सबके लिए
सुलभ कर दी गई थी। अब हर कोई एक निश्चित शुल्क देकर अपना संदेश एक स्थान से दूसरे
स्थान तक आसानी से भेज सकता है। अब तो डाक व्यवस्था में इतने आधुनिक उपकरणों का
इस्तेमाल किया जाने लगा है संदेश तार के जरिए पलक झपकते एक स्थान से दूसरे स्थान
तक पहुंचा दिया जाता है।
क्या आप जानते है। कि तार जिस मशीन से भेजा जाता है
उसका ही विकसित रूप टेलीप्रिंटर कहा जाता है। इसके अलावा फैक्स,
ई-मेल
के जरिए पलक झपकते सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा सकता है। इन उपकरणों के आ जाने
से सिर्फ डाक प्रणाली में नहीं बल्कि संचार माध्यमों को सूचनाएं इकट्ठी करने और
प्रसारित करने में भी काफी सुविधा हुई है। इन उपकरणों के बारे में हम पहले पढ़
चुके है।
संचार का अर्थ सिर्फ व्यक्ति का अपना हाल-समाचार दूसरों तक पहुंचाने तक सीमित नहीं है। हर व्यक्ति अपने या अपने संबंधियों की सूचनाएं जानने के अलावा देश-दुनिया की खबरों के बारे में जानने का इच्छुक होता है। उसके आस-पास क्या हो रहा है, दुनिया में कहों क्या घटना घट रही है, सबकी जानकारी प्राप्त करना चाहता है। सूचनाओं की इसी भूख के चलते संचार माध्यमों का लगातार विकास और विस्तार होता गया। आज अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव होता है या ईराक में लड़ाई छिड़ती है तो हर किसी की निगाह उस ओर लगी रहती है कि वहां क्या हो रहा होता है। वह हर पल की खबरें जानना चाहता है।
अगर आस्ट्रेलिया में क्रिकेट मैच हो रहा होता है तो आपकी जिज्ञासा लगातार बनी रहती है कि किस टीम की क्या स्थिति चल रही है। इसी तरह तो लोग व्यवसाय या किसी व्यापार से जुड़े हैं या शिक्षा संबंधी जानकारी चाहते है उनके लिए भी हर पल बाजार में वस्तुओं की कीमतों और शेयरों के उतार-चढ़ाव की खबरें जानना जरूरी होता है, दुनिया में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे प्रयोग के बारे में जानने की जिज्ञासा रहती है। किसानों को मौसम और खेती में इस्तेमाल होने वाली नई तकनीक की जानकारी काफी मद्दगार साबित होती है। जरा सोचिए, अगर, अखबार, रेडियो, दूरदर्शन, मोबाइल जैसे संचार माध्यम न होते तो क्या ये सूचनाएं आप तक पहुंच पाती।
अब संचार की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए तरह-तरह के
संचार माध्यमों का विकास कर लिया गया है। जल्दी-से-जल्दी सूचनाएं पहुंचाने की
दुनिया भर में होड़ लगी हुई है। पहले निर्धारित समय पर और एक निश्चित समय के लिए
समाचारों का प्रसारण हुआ करता था, वह
चौबीसों घंटे देश दुनिया की खबरों के प्रसारण लगातार दूरदर्शन के चैनलों में चलते
रहते हैं। आप में से बहुत से लोगों को शायद यह जानकारी भी हो कि जल्दी-से-जल्दी
सूचनाएं पहुंचाने के लिए संचार माध्यम क्या उपाय करते हैं, कई
लोगों के लिए यह जानना अभी भी काफी रोचक होगा।




धन्यवाद सर, बेहद कम शब्दों में सीधी बात
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