विवरणात्मक या कथात्मक लेखन (Narrative writing)

 विवरणात्मक या कथात्मक लेखन (Narrative writing)

Dr. Ved Prakash Bhardwaj

विवरणात्मक लेखन या वर्णनात्मक लेखन का अर्थ है किसी भी विषय का तथ्यात्मक लेखन। इसे कथात्मक लेखन भी कहा जाता है यानी किसी समाचार चा जानकारी को एक कथा की तरह क्रम से प्रस्तुत करना। वैसे कथा-लेखन में कल्पनाशीलता की आवश्यकता होती है परंतु मीडिया में कथात्मक लेखन का अर्थ कहानी की तरह खबर को क्रम से लिखना है। मुख्यतः समाचार लेखन को हम विवरणात्मक लेखन की श्रेणी में रखते हैं। समाचार पत्रों व अन्य समाचार माध्यमों में सबसे अधिक लेखन इसी प्रकार का होता है। समाचार व रिपोर्ताज लिखने में इसी शैली का प्रयोग किया जाता है।

विवरणात्मक लेखन का अर्थ है किसी भी घटना या जानकारी का सही विवरण देना। जब कोई घटना होती है तो पत्रकार उसके विवरणों को ध्यान में रखकर ही खबर लिखते हैं। खबर लिखते समय इस बात का ध्यान रखना होता है कि दिए गए विवरण सही क्रम में लिखे गए हों। यदि तथ्यों को अतार्किक रूप में आगे पीछे कर दिया जाएगा तो पाठक समाचार को ठीक से समझ नहीं पाएगा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इस बात का अधिक ध्यान रखना होता है। वहां श्रोता या दर्शक के पास दी जा रही जानकारी पर विचार करने का समय नहीं होता।

विस्तृत विवरण किसी समाचार या फीचर लेख को अधिक रोचक बनाता है। किसी घटना या कार्यक्रम को शब्दों में एक चित्र की तरह प्रस्तुत करने से पाठक दी गई सामग्री से अधिक जुड़ता है। प्रिंट मीडिया लेखन में वर्णनात्मक भाषा का उपयोग समाचार या फीचर लेखन को अधिक त्रि-आयामी बनाता है।

विवरणात्मक लेखन समाचारों के साथ ही फीचर लेखन में भी होता है। किसी भी विषय पर फीचर लिखते समय हम उस विषय के सभी पक्षों का विवरण देते है। उदाहरण के लिए हम यदि किसी बाजार पर फीचर लिखते हैं तो हमें उस बाजार के इतिहास को भी लिखना होगा। वर्तमान के साथ ही भावी संभावनाएं भी लिख सकते हैं, पर यह जरूरी नहीं है। जरूरी यह है कि बाजार कहाँ है, वहां क्या क्या मिलता है के साथ ही विशेष क्या मिलता है, प्रमुख दुकानें क्या हैं, बाजार का समय क्या है, वहां पहुंचने के साधन क्या हैं आदि का विवरण देना जरूरी हो जाता है। 

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