फीचर लेखन Feature writing
फीचर लेखन
डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज
1. फीचर का अर्थ
फीचर लेखन यथार्थवादी लेखन है जो तथ्यों पर आधारित होता है पर इसके साथ ही फीचर रचनात्मक
लेखन भी है। फीचर को एक तरह से सॉफ्ट न्यूज
कहा जा सकता है। फीचर को रम्य रचना या ललित लेखन भी कहा जा सकता है। फीचर में लेखक
किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान आदि के बारे में तथ्यात्मक जानकारियां देता है। फीचर लेखन
एक कला है जो समाचार लेखन से भिन्न होती है। एक समाचार में हम सिर्फ तथ्यों पर फोकस
करते हैं। फीचर में तथ्यों के साथ लेखक की भावनाएं व विचार प्रमुख होते हैं। इसीलिए
फीचर लेखन को भावनात्मक लेखन भी कहा जा सकता है। परंतु इन भावनाओं का आधार यथार्थ होता
है। फीचर में रिपोर्टिंग का
तत्व
अनिवार्य रूप से शामिल होता है।
फीचर लेखन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आज सभी माध्यमों में फीचर
की आवश्यकता होती है। अखबारों व पत्रिकाओं के अलावा रेडियो, टीवी व डिजिटल माध्यमों
पर फीचर लेखन का चलन बढ़ता जा रहा है। फीचर व्यावसायिक दुनिया में विज्ञापन का भी एक
रूप है। कम्पनियां सीधे-सीधे विज्ञापन देने के अलावा प्रायोजित फीचर का प्रकाशन भी
कराती हैं।
2. फीचर का उद्देश्य
फीचर लेखन का उद्देश्य किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान आदि की वस्तुपरक
और व्याख्यात्मक जानकारी लोगों को देना है। फीचर का काम किसी भी विषय को पूर्णता में
व्यक्त करना है। इसीलिए फीचर में वर्तमान के साथ ही विषय का इतिहास भी शामिल होता है।
कई बार लेखक फीचर में विषय के संदर्भ में भविष्य की संभावनाएं भी लिखता है। इस तरह
से कहा जा सकता है कि फीचर का उद्देश्य पाठकों, श्रोताओं व दर्शकों को विषय की पूरी
जानकारी देना है। साथ ही फीचर का उद्देश्य लोगों का मनोरंजन करना भी है।
3. फीचर लेखन की शैली
फीचर लेखन संचार की ऐसी विधा है जिसके लेखन को किसी खास सीमा में
बांधना संभव नहीं है। जिस तेजी से फीचर के विषयों का विस्तार हो रहा है उसी के अनुरूप
उसकी नई लेखन शैलियां भी सामने आ रही हैं। मुख्य
रूप से फीचर को आकर्षक, तथ्यात्मक और मनोरंजक होना चाहिए।
फीचर लिखने की शैली दूसरी विधाओं से अलग होती है। इसमें विवरण के
साथ व्याख्यात्मक शैली का प्रयोग किया जाता है। भाषा सरल होने के साथ ही प्रतीकात्मक
व अलंकारिक होती है। इसके साथ ही फीचर इस तरह से लिखा जाना चाहिए कि पाठक उसके साथ
मानसिक और भावनात्मक सामंजस्य स्थापित कर सके। फीचर में जानकारी के साथ ही मनोरंजन
भी होना चाहिए।
फीचर लेखन की शैली संचार माध्यमों के चरित्र पर भी निर्भर करती है।
एक ही विषय पर प्रिंट, रेडियो, टीवी, डिजिटल मीडिया के लिए फीचर लिखते समय उन माध्यमों
की विशेषताओं व आवश्यकताओं का ध्यान रखना होता है।
4. फ़ीचर के लक्षण या उसका
चरित्र
फीचर का उद्देश्य लोगों को
किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु, स्थान आदि के बारे में जानकारी देने के साथ ही उसका
मनोरंजन करना भी होता है। इसीलिए दूसरे लेखनों की तुलना में इसका चरित्र या इसके
लक्षण अलग हो जाते हैं। किसी भी विषय के प्रति लोगों को आकर्षित करने का एक अच्छा
माध्यम फीचर हो सकता है। फ़ीचर सूचना, निर्देश और सलाह देता है, लेकिन प्राथमिक उद्देश्य मनोरंजन करना है। फीचर मानवीय रुचियों
का विस्तार करते हैं और उन्हें दिशा दिखाते हैं। वे तथ्यात्मक हैं और उन्हें
रिपोर्टिंग की आवश्यकता होती है, लेकिन
वह समाचार नहीं होते। फीचर लेखन के चरित्र या लक्षणों को हम निम्न बिंदुओं से समझ
सकते हैं-
1 सूचना
2 निर्देश और सलाह
3 मनोरंजन
4 मानव हित
5 तथ्यात्मक और लाइव
रिपोर्टिंग
6 मौलिकता
7 विस्तृत व सुगठित लेखन
8 रूप सज्जा – भाषा और चित्र
9 समयबद्धता
10 नवीनता
5. फीचर के विषय
फीचर लेखन के लिए विषयों की कोई सीमा नहीं है। सामान्यतः सांस्कृतिक
विषयों पर फीचर अधिक लिखे जाते हैं। पर्व, उत्सव, मौसम, फैशन, खानपान, पारिवारिक व
सामाजिक सम्बन्ध, फ़िल्म, खेल, पर्यटन स्थल, प्रसिद्ध व्यक्ति, विशिष्ट व्यक्ति, पुस्तकें,
खानपान, स्वास्थ्य, शिक्षा, बाज़ार, विज्ञान, तकनीक आदि सब फीचर के विषय हैं। विषयों
के संदर्भ में फीचर लेखन की कोई सीमा नहीं है।
फीचर लेखन के कुछ लोकप्रिय विषय
1 कला और संस्कृति
2 सार्वजनिक व्यक्तित्व
3 स्थान
4 सिनेमा
5 जीवन शैली: फैशन और
खाद्य पदार्थ
6 खेल
7 विज्ञान
8 व्यक्तित्व विकास
9 पशु और पक्षी
10 प्रकृति
11 गैजेट्स
12 मीडियाः न्यू मीडिया
प्रभाव
13 नौकरियां
14 शिक्षा
15 रिश्ते
6. फीचर के
प्रकार
फीचर लेखन के कई प्रकार हैं। इन्हें हम विषयों के हिसाब से भी विभाजित
कर सकते हैं।
लेखन शैली के स्तर पर दो तरह के फीचर होते हैं-
1. विवरणात्मक फीचरः विवरणात्मक
फीचर का मूल उद्देश्य लोगों को जानकारी देना है। इसमें हम उन सभी फीचर को शामिल
करते हैं जो मूलरूप मे किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान आदि के बारे में जानकारी देते
हैं। इस तरह के फीचर लेखन को विवरणात्मक या यथार्थवादी लेखन भी कहा जाता है जो
समाचार लेखन के काफी निकट होता है। इसमें न्यूज फीचर, पर्यटन, बाजार, उपभोक्ता
वस्तुएं आदि पर फीचर को शामिल किया जा सकता है। इस प्रकार के फीचर की भाषा एकदम
साधारण होती है तथा सभी विवरण सीधे-सीधे दिए जाते हैं। इसमें कल्पनाशीलता का
प्रयोग नहीं होता है। विज्ञापन जगत में इस तरह का फीचर लेखन अधिक होता है। समाचार
पत्रों में भी इसका खूब इस्तेमाल किया जाता है।
2. व्याख्यात्मक फीचरः
इसमें वह फीचर आते हैं जिनमें लेखक किसी विषय पर व्याख्यात्मक लेखन करता है। यहां
व्याख्या का अर्थ है कि लेखक इसमें तथ्यों के साथ उनपर अपने विचार रखता है, तथ्यों
का विश्लेषण करता है, गुण-दोष की विवेचना करता है। यह समीक्षा का कुछ अधिक रोचक और
सजावटी रूप कहा जा सकता है। व्यक्ति-चित्रण, निजी अनुभव, मानवीय स्वभाव व उसकी
रुचियां, साहित्य, कलाएं आदि पर लिखे जाने वाले फीचर को इस श्रेणी में रखा जा सकता
है।
विषय के स्तर पर फीचर निम्न प्रकार के हो सकते हैं-
1. समाचार फीचर
2. ऐतिहासिक फीचर
3. पर्व व त्यौहार फीचर, इन्हें हम धार्मिक फीचर भी कहते हैं।
4. मनोरंजक फीचर जिसमें सिनेमा, साहित्य, नाटक, ललित कलाओं को शामिल
किया जा सकता है।
5. खेल फीचर
6. व्यक्तित्व फीचर
7. खोजपरक फीचर
8. फोटो फीचर
9. तकनीक व विज्ञान फीचर
10. शिक्षा फीचर
11. स्वास्थ्य
फीचर
12. व्यक्तित्व विकास
13. प्रेरक फीचर
14. फोटो फीचर
15. निजी संबंध
16. प्रकृति
7. फीचर लेखन का प्रारूप और
प्रक्रिया
फीचर लेखन वैसे तो ऐसा लेखन
है जो लेखक को शैली से लेकर विषय आदि के स्तर पर अधिक स्वतंत्रता प्रदान करता है।
इसका अर्थ है कि लेखक क्या लिखना है और किस तरह लिखना है इसके लिए अन्य प्रकार के
लेखन से अधिक स्वतंत्र होता है। फिर भी फीचर लेखन के प्रारूप को लेकर कुछ सामान्य
नियम स्वीकार किये जाते हैं जो निम्न प्रकार से हैं
1 शीर्षक
2 डेक: हाइलाइट किए गए परिचय
या उप-शीर्षक के रूप में भी जाना जाता है। डेक सुविधा के प्रवेश द्वार का राजा है।
ज्यादातर लेखक अपने लेखन के कुछ रोचक और आकर्षक हिस्से को पाठकों को आकर्षित करने
के लिए शुरुआत में मोटे अक्षरों में इस्तेमाल करते हैं। जहाज में डेक हमेशा आकर्षण
का केंद्र होता है। फीचर लेखन में, डेक एक प्रकार का संक्षिप्त परिचय है।
3 परिचय: यह फीचर राइटिंग का
महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक अच्छा और प्रभावशाली परिचय या परिचय सफल लेखन की कुंजी
है। लेखक हमेशा इस पर ध्यान केंद्रित करता है और विषय का पूरा परिचय देने का
प्रयास करता है।
4 मुख्य भाग: यह फीचर राइटिंग
का मुख्य भाग है जिसे कई भागों में विभाजित किया जा सकता है। कभी-कभी लेखक पाठकों
का मार्गदर्शन करने के लिए विभिन्न उप-शीर्षकों या उप-अनुभागों का उपयोग करते हैं।
इस भाग में लेखक विषय और उसकी प्रासंगिकता के बारे में पूरी विस्तृत जानकारी देता
है। मुख्य शरीर हमेशा आकर्षक और पारंपरिक होता है। इसमें मुख्य विषय में उसके
वर्तमान के साथ ही इतिहास यानी पृष्ठभूमि को भी शामिल किया जा सकता है। इसमें
मुख्य विषय से जुड़े दूसरे संदर्भों का प्रयोग भी किया जा सकता है।
5 उपसंहार या निष्कर्ष: फीचर
लेखन में निष्कर्ष का एक अलग अर्थ है। एक फीचर कहानी में निष्कर्ष का अर्थ है कि
उसका अंत इस प्रकार से हो कि पाठक को पूर्ण संतुष्टि हो जाए। विषय के बारे में पूरी
जानकारी दे दी गयी है, इसका संकेत निष्कर्ष में यानी उपसंहार में करना चाहिए।
कुछ विद्वानों ने फीचर लेखन की प्रक्रिया में साज-सज्जा को भी शामिल
किया है। साज-सज्जा से अर्थ है कि फीचर में पाठ के साथ उपयोगी चित्रों, तालिकाओं या
विशेष उल्लेख्य बातों को बॉक्स के रूप में देना। वैसे यह काम संपादकीय विभाग का होता
है। पर एक लेखक से यह उम्मीद की जाती है कि वह अपने फीचर को बेहतर साज-सज्जा के साथ
प्रस्तुत करे और आवश्यक चित्र, चार्ट आदि
भी प्रस्तुत करे।
8. फीचर और
लेख में अंतर
फीचर और लेख में सामान्यतः लोग अंतर नहीं कर पाते हैं। आमतौर पर
माना जाता है कि संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित होने वाला लेख है और दूसरे पृष्ठों पर
प्रकाशित होने वाले फीचर होते हैं। लेख और फीचर में मूल अंतर यह है कि लेख विचार प्रधान
होते हैं जबकि फीचर सूचनाप्रद, मनोरंजक व भावप्रधान होते हैं। लेख यदि मानसिक चित्र
हैं तो फीचर भावचित्र हैं।
9. फीचर लेखन
की सामग्री
एक अच्छा फीचर वह है जिसे पढ़ते समय स्वादिष्ट भोजन खाने जैसा या
किसी पुराने आत्मीय से मुलाकात जैसा अनुभव हो। एक अच्छा फीचर लिखने से पहले उसकी तैयारी
करना आवश्यक है। इस तैयारी में आपको यह पता होना चाहिए कि क्या लिखना है, क्यों लिखना
है और कैसे लिखना है। इस आधार पर फीचर की सामग्री या विषय-वस्तु निम्न प्रकार से विभाजित किया जा सकता है:-
विषय- सबसे पहले आपको यह तय करना होगा कि आप किस विषय पर लिखना चाहते
हैं। विषय का चयन ज्यादातर लेखक अपनी पसंद से करता है। प्रत्येक लेखक सभी विषयों पर
नहीं लिखता। कुछ लेखक केवल चुनिंदा विषयों पर ही लिखते हैं। बहुत बार अखबार, पत्रिका,
रेडियो आदि की तरफ से किसी विशेष विषय पर फीचर लिखने को कहा जाता है। इस प्रकार फीचर
की पहली सामग्री विषय है। विषय का चुनाव करते समय उसके सामयिक संदर्भ को ध्यान में
रखना होता है।
जानकारी व तथ्य – फीचर लेखन की सामग्री में विषय के बाद स्थान आता है उस
विषय से जुड़ी जानकारियों व तथ्यों का। फीचर लेखन के लिए जिस भी विषय को चुना गया
है लेखक को उसकी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां और तथ्य लिखना चाहिए। इसमें तथ्यों
के साथ ही विषय पर महत्वपूर्ण व्यक्तियों के कथन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे
फीचर में रोचकता आती है।
उद्देश्य- सबसे पहले आपको यह स्थापित करना होगा कि आपके लेखन का उद्देश्य क्या है। आप
लोगों को कोई जानकारी देना चाहते हैं या कोई बात समझाना चाहते हैं।
मानवीय रुचिः फीचर
लेखन की सामग्री में मानवीय रुचि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए लेखक को
चुने गये विषय में कितने लोगों की व किस स्तर तक की रुचि होगी इसकी जानकारी होनी
चाहिए। साथ ही लिखते समय उसे प्रयास करना चाहिए कि वह अधिकतम लोगों की रुचि को
जागृत कर सके।
रोचकताः लेखक को फीचर में
रोचकता रहे इसका भी ध्यान रखना चाहिए। फीचर मुख्यरूप से सूचनाप्रधान मनोरंजक लेखन
है। उसमें यदि रोचकता नहीं होगी तो पाठक जल्दी ही ऊब जाएगा व पढ़ना बंद कर देगा।
फीचर को रोचक बनाने में उसकी भाषा व सज्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भाषाः फीचर लेखन की एक
महत्वपूर्ण सामग्री या तत्व उसकी भाषा है। लेखक को इस बात का ध्यान रखना होता है
कि भाषा न केवल सरल व सहज हो बल्कि विषय के अनुकूल भी हो। भाषा में अलंकारिकता,
रोचकता का गुण होना चाहिए।
मनोरंजनः फीचर
लेखन का एक तत्व मनोरंजन है। लेखक को किसी भी विषय पर लिखते समय उसमें मनोरंजन के
लिए सामग्री का भी प्रयोग करना चाहिए। इसके लिए लेखक चाहे तो विषय से जुड़ी
कहानियों, कविताओं आदि का भी प्रयोग कर सकता है।
वर्तमान संदर्भः लेखक को फीचर
लिखते समय उस विषय के वर्तमान संदर्भों का ध्यान रखना चाहिए। कोई भी फीचर अपने
वर्तमान संदर्भों के कारण ही पाठकों को बांध पाता है।
मानवीय उदाहरणः फीचर लेखन की
सामग्री का एक हिस्सा मानवीय उदाहरण है। मानवीय उदाहरण का अर्थ है कि फीचर में
यथासंभव ऐसे उदाहरण देना चाहिए जिनमें मानवीय उपस्थिति का अनुभव हो। इसके लिए लेखक
आवश्यक होने पर किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के कथनों का प्रयोग भी कर सकता है।
कथा-तत्वः फीचर लेखन की
सामग्री का एक अंग कथा-तत्व है। इसका अर्थ है कि फीचर में एक कहानी होनी चाहिए या
उसे इस तरह लिखा जाना चाहिए कि पाठकों को उसे पढ़ते हुए कहानी पढ़ने का आभास हो।
कथा-तत्व का एक अर्थ यह भी है कि उसका विकास एक कहानी की तरह क्रमबद्ध तरीके से
होना चाहिए।
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