मीडिया लेखन के प्रकार


 मीडिया लेखन के प्रकार

लिखना एक कला है, और यह कला मनुष्य को जन्मजात प्राप्त नहीं होती। इसे अध्ययन और अभ्यास से अर्जित किया जाता है। मीडिया के लिए लिखना एक सृजनात्मक कार्य है। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और न्यू मीडिया के लिए लेखन में कुछ बातें सामान्य हैं।  समाचार,  फीचर,  लेख, समीक्षा, साक्षात्कार,  वार्ता,  कमेंट्री आदि लेखन सभी प्रकार के मीडिया की आवश्यकता है। साहित्य, सिनेमा व रंगमंच के लिए अलग तरह का लेखन होता है जिनमें कहानी, कविता-गीत के साथ ही पटकथा, संवाद आदि शामिल हैं।

मीडिया के विभिन्न माध्यमों की विभिन्न विधाओं का संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है

१ समाचार

समाचार लेखन मीडिया का सबसे अधिक प्रचलित और महत्वपूर्ण लेखन है। समाचार किसी घटना की ऐसी अविलंब सूचना है जिसमें नवीनता और साधारणता, व्यापकता और स्पष्टता आदि गुण होते हैं। समाचार लेखन मूलतः दैनिक समाचार पत्रों, टीवी समाचार चैनलों और रेडियो के लिए किया जाता है। इसमें छह ककार यानी कब, क्या, कहां, क्यों, कैसे और कौन के नियम का पालन करना होता है। नवीनता समाचार का अनिवार्य तत्व है।

समाचार विश्लेषण: समाचार यानी ख़बर के साथ ही विभिन्न प्रकार के मीडिया में समाचार विश्लेषण भी लिखे जाते हैं। सामान्यतः समाचार में हम किसी भी घटना के केवल तथ्यों को लिखते हैं। समाचार विश्लेषण में किसी समाचार के तथ्यों को केंद्र में रखते हुए उसपर वैचारिक लेखन किया जाता है। इसमें पत्रकार किसी खबर के विभिन्न पक्षों के अच्छे-बुरे परिणामों के साथ ही उससे सम्बंधित अन्य जानकारियां देता है। समाचार विश्लेषण वैचारिक लेखन है जिसे ओपीनियन राइटिंग भी कहा जा सकता है पर यह लेख, समीक्षा आदि से भिन्न होता है। समाचार विश्लेषण का केंद्रीय तत्व समाचार और उसके तथ्य ही होते हैं। इसके विपरीत लेख आदि में विचार केंद्र में होते हैं। 

२ संपादकीय

संपादकीय लेखन का अपना विशिष्ट महत्व होता है। समाचार पत्र में विस्तार तत्व की अभिव्यक्ति के लिए संपादकीय लिखा जाता है। यह लेख संपादक द्वारा या उसकी तरफ से उसके किसी सहयोगी द्वारा लिखा जाता है। मुख्य रूप से संपादकीय लेख विभिन्न समसामयिक एवं तात्कालिक घटनाओं और समस्याओं की समीक्षा या उन पर उठने वाले प्रश्नों पर तर्क पूर्ण टिप्पणियां होती है। संपादकीय लेख को प्रकाशन की आवाज माना जाता है।

३ फीचर

फीचर पत्रकारिता की लोकप्रिय विधा है। फीचर किसी स्थान, परिवेश या घटना का ऐसा शब्द चित्र होता है जो भावात्मक संवेदना से परिपूर्ण,  कल्पनाशीलता से युक्त और मनोरंजक होता है। इसमें किसी भी विषय को चित्रात्मक शैली में, सरल रूप से अभिव्यक्त किया जाता है। फीचर का उद्देश्य पाठकों को जानकारी देने के साथ ही उनका मनोरंजन करना भी होता है। फीचर किसी भी विषय पर हो सकता है। सांस्कृतिक कार्यक्रम, कला, पर्यटन स्थल, ऐतिहासिक व्यक्तित्व और स्थल, सिनेमा, जीवनशैली आदि फीचर लेखन के प्रमुख विषय हैं।

४ साक्षात्कार

पत्रकारिता में साक्षात्कार एक प्रमुख और प्रभावशाली विधा है। साक्षात्कार द्वारा किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व और उसके विचारों का साक्षात अनुभव किया जाता है। सामान्य शब्दों में कहा जाए तो इसमें किसी विशिष्ट व्यक्ति से भेंट कर उसके विचारों,  भावनाओं और जीवन दर्शन को पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। तात्कालिक राजनीति, सामाजिक आदि विषयो पर भी साक्षात्कार प्रकाशित होते हैं।

५ विज्ञापन

विज्ञापन व्यवसायिक संचार का महत्वपूर्ण अंग है। यह समाज को किसी वस्तु, सेवा या संदेश के विषय में विशिष्ट सूचना देता है। वस्तु -विशेष के प्रति एक व्यक्ति के दृष्टिकोण को सकारात्मक रूप में बदलने के लिए विज्ञापन का उपयोग किया जाता है। सरकारी द्वारा अपनी नीतियों, योजनाओं व उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए विज्ञापन का सहारा लिया जाता है। व्यावसायिक संगंठनों  द्वारा सेवाओं व वस्तुओं की जानकारी देने के लिए विज्ञापन का सहारा लिया जाता है। विज्ञापन में प्रसिद्ध हस्तियों, चित्रों का उपयोग किया जाता है।  

६ समीक्षा

समीक्षा लेखन पत्रकारिता की विधाओं में से एक है। समीक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति कर सकता है परंतु पत्रकारिता में यह विशेषज्ञता का क्षेत्र माना जाता है। यह एक बौद्धिक क्रिया है। समीक्षा में पुस्तक समीक्षा, फिल्म, नाटक, कला आदि शामिल हैं इसलिए समीक्षा का कार्य संबंधित क्षेत्र में विशेष जानकारी रखने वाले से कराया जाता है। व्यावसायिक दुनिया में उत्पादों की समीक्षा कराई जाती है। फूड व फैशन ब्लॉग समीक्षा के नए क्षेत्र हैं।

७ परिचर्चा

परिचर्चा पत्रकारिता की एक विशिष्ट विधा है। समसामयिक विषयों पर लोगों की रूचि और प्रतिक्रिया जानने के लिए विभिन्न समाचार माध्यम नियमित रूप से परिचर्चा का आयोजन करते हैं।  इसके द्वारा किसी महत्वपूर्ण विषय पर लोगों की राय को समाज तक लाया जाता है, जिससे जनमत का निर्माण होता है। सामान्य और विवादास्पद विषयों पर होने वाली परिचर्चाओं से उस विषय पर लोगों के विचारों का पता चलता है। चुनाव के समय परिचर्चा के द्वारा विभिन्न वर्गों के प्रतिविधियों से अनेक राजनीतिक विषयों पर गंभीर परिचर्चा में की जाती है।

८ भेंटवार्ता

सामान्य रूप से यह विधा रेडियो वार्ता के निकट है। इसमें किसी महत्वपूर्ण विषय पर संबंधित व्यक्ति से बातचीत की जाती है। यह बातचीत साक्षात्कार की तरह ही होती है।

९ लेख

किसी भी विषय पर विचारप्रधान अभिव्यक्ति को लेख कहा जाता है। समाज के गंभीर मसलों पर समाचार पत्र पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित होते हैं। यह लेख विभिन्न विषय हो सकते हैं जैसे राजनीति, शासकीय नीतियां,  अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल,  कृषि,  शिक्षा आदि। लेख सामान्यतः स्वतंत्र पत्रकार व लेखक लिखते हैं। समाचार पत्रों में लेखों का प्रकाशन संपादकीय पृष्ठ पर किया जाता है।

10. स्तंभ लेखन

समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में स्तंभ लेखन का अर्थ है कि किसी एक विषय पर एक पत्रकार या लेखक द्वारा नियमित अंतराल पर या प्रत्येक अंक में लेख लिखना। स्तंभ में लेखक मूलतः किसी विषय पर अपने विचार लिखते हैं। स्तंभ लेखन के लिए प्रकाशन में स्थान व उसकी सीमा तय होती है। कई समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में संपादक नियमित स्तंभ लिखते हैं।

१० कविता, कहानी, लघु कथा, निबंध, यात्रा-वृतांत आदि लेखन

साहित्य और पत्रकारिता का पुराना और गहरा संबंध रहा है। समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में कविता, कहानी, निबंध, गीत, व्यंग्य सहित कई विधाओं का प्रकाशन होता है। साहित्यिक विधाओं के लेखक आम पत्रकारों से अलग होते हैं। अनेक पत्रकार कवि, कहानीकार, व्यंग्य लेखक भी होते हैं। पत्रकारिता में कहानी, पटकथा व संवाद लेखन की भी संभावना रहती है। विशेषरूप से टीवी, रेडियो, फिल्म आदि में साहित्यिक विधाओं में लेखन की आवश्यकता होती है। रेडियो पर कहानियों, कविताओं, रूपक आदि का प्रसारण होता है। इसके साथ ही कहानियों के नाट्य रूपांतरण भी किया जाता है।  

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