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Challenges before political journalism

Challenges before political journalism Dr. Ved Prakash Bhardwaj Political journalism is a significant fraction of overall journalism. In this, political journalists always focused on the political activities of the ruling party as well as the opposition parties and informed about them, citizens. Political journalists not only give information to the citizens but also the findings of that information. A political journalist analyzes the policies and schemes of the government, keeps an eye on their implementation, and analyzes the final result. The work of political journalism is also to educate and spread the knowledge of politics to the citizens. Political journalism often contains opinion journalism, as present political events can be prejudiced in their reporting. The information provided includes facts; its perspective is subjective and leans towards one viewpoint. Political journalism is available through different mediums, like Print, TV, Radio, Digital, or online reporting. Digi...

Media and Public Opinion

Media and Public Opinion Dr. Ved Prakash Bhardwaj In the republic political system we have a government, called a democratic government for the people and by the people. Liberty and democracy is two sides of political coin of Indian political system. The media does a central role in Indian politics. We accept media as the fourth pillar of democratic society. We strongly believe that media is a powerful tool to control politics and government. Media has a duty to convey the public feelings to the government. But in recent time, we show that political organizations use media to influence the public and its opinions. The last few years viewed a tougher interface between the media and consequently the commoner. it is the media (newspaper, TV, social media, Internet, etc.) has developed to be a part of the generation of the humans of India, who believes that they have a moral duty to secure public interest. But in recent years, we saw that major part of media become the puppet. Media kee...

टीवी के लिए लेखन writing for TV programs

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टीवी के लिए लेखन डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज टीवी लेखन कई विधाओं में किया जाता है। टीवी पर मुख्यरूप से दो तरह के कार्यक्रम अधिक होते हैं, समाचार व मनोरंजन कार्यक्रम। समाचारों में सामान्य समाचारों के अलावा टॉक शो, पैनल डिस्कशन व साक्षात्कार भी शामिल हैं। टॉक शो: यह टीवी का एक लोकप्रिय कार्यक्रम है। इसे कुछ लोग इंटरव्यू भी समझते हैं पर इंटरव्यू और टॉक शो में अंतर होता है। इंटरव्यू में साक्षात्कार लेने वाला प्रश्न करता है और साक्षात्कार देने वाला उन्हीं सवालों के दायरे में जवाब देता है। टॉक शो में साक्षात्कार देने वाला मेहमान कहलाता है। इसमें मेहमान बातचीत के दौरान अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में या दूसरे सन्दर्भों में भी अपनी बात कह सकता है। टॉक शो में बीच में वीडियो क्लिप या पुराने फोटोग्राफ्स का भी प्रयोग किया जा सकता है। साक्षात्कार एक तरह से सार्वजनिक विषय पर होता है जबकि टॉक शो व्यक्तिगत होता है। फारुख शेख के टॉक शो 'शख्सियत विथ फारुख शेख' और 'जीना इसी का नाम है' के अलावा 'कॉफी विद करण' मशहूर टॉक शो रहे हैं। पैनल डिस्कशन: इसमें किसी एक विषय पर एंकर तीन-चार ल...

रेडियो लेखन

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रेडियो लेखन डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज रेडियो के लिए लिखते समय लेखक को इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि वह सुनने के लिए लिख रहा है। इसलिए बात बहुत साफ-सुथरे ढंग से तथा सरलतम रूप में कही जानी चाहिए। आँखों से देखने अर्थात्‌ टेलीविजन के लिए लिखने में इतनी सावधानी की आवश्यकता नहीं होती है। प्रत्येक भाषा के दो रूप होते हैं। पहला- उच्चारित और दूसरा- लिखित। उच्चारित शब्दों की शक्ति असीम है। लिखित शब्दों की शक्ति उनसे कुछ कम आँकी जाती है। रेडियो लेखन में भाषा को दोनों रूपों से होकर गुजरना पड़ता है। रेडियो लेखन में श्रोताओं की पसन्द को ध्यान में रखा जाना अत्यन्त आवश्यक होता है। रेडियो के लिए लिखते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए 1. वाक्य छोटे और सरल करना चाहिए। 2. कठिन व अप्रचलित शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। 3. दो वाक्यों को जोड़ने के लिए 'व' या 'तथा' के स्थान पर “और' का ही प्रयोग प्रचलित है। 4. रेडियो पर हर कार्यक्रम की समय-सीमा निर्धारित होती है इसलिए लिखते समय ध्यान रखना चाहिए कि आलेख निर्धारित समय में पूरा हो जाए। 5. क्षेत्रीय रुचि के कार्यक्रमों में क्षेत्...

रिपोर्ताज लेखन

रिपोर्ताज लेखन डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज रिपोर्ताज और रिपोर्ट यानी समाचार को अक्सर एक ही समझ लिया जाता है। इसका एक बड़ा कारण दोनों का ही मूल कोई खबर होना है। रिपोर्ताज को सामान्य समाचार से अलग माना जाता है। एक सामान्य समाचार में कोई भी रिपोर्टर किसी घटना या कार्यक्रम की जानकारी देता है। एक रिपोर्टर बगैर घटनास्थल पर जाए भी उस घटना की खबर लिख सकता है। वह प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर खबर लिख सकता है, पुलिस प्रेस नोट के आधार पर खबर लिख सकता है। यानी सामान्य समाचार लिखने के लिए रिपोर्टर का उस खबर से प्रत्यक्ष संपर्क में आना जरूरी नहीं होता। इसके विपरीत रिपोर्ताज का अर्थ होता है ऐसा समाचार जो रिपोर्टर ने अपने प्रत्यक्ष अनुभव से लिखा है। संवाददाता ऐसी खबरों को लिखते समय अपने अनुभव को प्रमुख आधार बनाता है। वह घटनास्थल की सम्पूर्ण जानकारी देता है, वहां के वातावरण, आसपास के लोगों के बारे में जानकारी देता है। वह घटना के तत्कालिक प्रभाव को भी लिखता है। वह आवश्यकतानुसार वहां उपस्थित लोगों का संक्षिप्त साक्षात्कार भी लेता है जिसमें वह लोगों की राय प्राप्त करता है। इस प्रकार रिपोर्ताज एक प्...

संचार का अर्थ व परिभाषाएं Definitions and meaning of communication

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संचार का अर्थ व परिभाषाएं डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज  दो या दो से अधिक व्यक्ति आपस में कुछ सार्थक चिह्नों , संकेतों या प्रतीकों के माध्यम से विचारों या भावनाओं का आदान-प्रदान करते हैं तो उसे संचार कहते हैं। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार- विचारों , जानकारी वगैरह का विनिमय , किसी और तक पहुंचाना या  बांटना , चाहे वह लिखित , मौखिक या सांकेतिक हो , संचार है। चार्ल्स ई. ऑसगुड के अनुसार- आम तौर पर संचार तब होता है , जब एक सिस्टम या स्रोत किसी दूसरे या गंतव्य को विभिन्न प्रकार के संकेतों के माध्यम से प्रभावित करें ।   जोसेफ डिनिटी - “ जनसंचार बहुत से व्यक्ति में एक मशीन के माध्यम से सूचनाओं , विचारों और दृष्टिकोणों को रूपांतरित करने की प्रक्रिया है। ” डी.एस. मेहता - “ जनसंचार का अर्थ है जन संचार माध्यमों - जैसे रेडियो , दूरदर्शन , प्रेस और चलचित्र द्वारा सूचना , विचार और मनोरंजन का प्रचार-प्रसार करना। ” जार्ज ए. मिलर - “ जनसंचार का अर्थ सूचना को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना है। ” जवरीमल्ल पारेख - “ जनसंचार का अर्थ है जन के लिए संचार के माध्यम। टीड - का कहना है कि...