समाचार पत्र व पत्रिकाओं के लिए लेखन

 समाचार पत्र व पत्रिकाओं के लिए लेखन

डॉ. वेद प्रकाश भारद्वाज

पहले इस बात पर विचार किया जाए कि समाचार पत्र और पत्रिका क्या है?

समाचार पत्र : समाचार पत्र का अर्थ है जन-संचार का वह मुद्रित माध्यम जो लोगों तक नवीनतम जानकारियां पहुंचाने का काम करता है। इसके नाम से ही स्पष्ट है कि इनका मुख्य कार्य समाचारों का सम्प्रेषण है। समाचार का अर्थ है प्रतिदिन होने वाली घटनाएं। समाचार पत्रों में समाचारों के साथ ही समाचार विश्लेषण, संपादकीय, लेख, फीचर आदि भी प्रकाशित होते हैं। इसके साथ ही विशेष विषयों, शिक्षा, रोजगार, सिनेमा, साहित्य, कला आदि पर परिशिष्ट प्रकाशित किए जाते हैं। समाचार पत्रों में महिलाओं व बच्चों के लिए भी पृष्ठ होते हैं। आजकल समाचार पत्र आंशिक रूप से पत्रिकाओं की भूमिका भी निभाते हैं। इसके बाद भी समाचार पत्रों का मुख्य कार्य समाचार देना है। इसीलिए समाचार पत्रों में लेखन अलग तरह से किया जाता है। उनमें विज्ञान व तकनीकी विषयों पर भी आसान भाषा में लिखना होता है। समाचार पत्रों के लेखन को इसीलिए विवरणात्मक लेखन कहा जाता है।

पत्रिका : समाचार पत्र से अलग पत्रिका का प्रकाशन एक अंतराल पर होता है। आमतौर पर पत्रिकाओं का प्रकाशन मासिक होता है पर जो पत्रिकाएं समाचार पर आधारित होती हैं वह साप्ताहिक या पाक्षिक भी होती हैं। विशेष विषयों पर पत्रिकाओं का प्रकाशन त्रैमासिक, अर्धवार्षिक या वार्षिक आधार पर भी होता है। साहित्य की अनेक पत्रिकाएं अनियमित होती हैं। पत्रिकाओं के लिए किए जाने वाले लेखन को व्याख्यात्मक शैली का लेखन कहा जाता है। पत्रिकाओं के लिए किए जाने वाले लेखन में भाषा विषय के अनुरूप होती है था उसमें विचारों की प्रधानता होती है।

समाचार पत्र व पत्रिका लेखन की तुलना

समाचार पत्र और पत्रिकाओं का चरित्र एकदम अलग होता है। दोनों ही संचार के माध्यम हैं। समाचार पत्र मूलतः प्रतिदिन होने वाली घटनाओं की जानकारी देते हैं। समाचार पत्र में लेखन में तथ्यों को अधिक महत्व दिया जाता है।  इसके विपरीत पत्रिकाओं में प्रतिदिन के समाचारों की जगह उन समाचारों का विश्लेषण, उनपर वैचारिक लेखन किया जाता है। अनेक पत्रिकाएं किसी एक विशेष विषय पर केंद्रित होती हैं, जैसे खेल, सिनेमा, फैशन, जीवनशैली, महिलाएं, गृहसज्जा, वाहन, साहित्य आदि। कई समाचार प्रधान पत्रिकाएं भी होती हैं जैसे इंडिया टुडे, आउटलुक आदि। कुछ पत्रिकाएं सामयिक महत्वपूर्ण समाचारों का आंशिक रूप से प्रकाशन करती हैं।

समाचार पत्र में लेखन में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होता है। उदाहरण के लिए सरल भाषा, घटना-प्रधान लेखन, तात्कालिकता, तथ्यात्मक आदि। समाचार पत्र मूलतः समाचार देने का काम करते हैं। इसके अलावा उनमें लेख, फीचर आदि का प्रकाशन भी होता है। समाचार पत्रों में विश्लेषण भी होते हैं जो आमतौर पर तात्कालिक घटनाओं पर आधारित होते हैं। इसीलिए समाचार पत्रों में लेखन अपेक्षाकृत आसान होता है। समाचार लेखन में तथ्यों पर अधिक बल दिया जाता है इसलिए उनकी भाषा सरल होती है।

कुछ पत्रिकाएं समाचार केंद्रित होती हैं परंतु उनका प्रकाशन एक निश्चित समय के अंतराल पर होने से उनमें समाचारों का चरित्र अलग होता है। उदाहरण के लिए हम इंडिया टूडे पत्रिका को देख सकते हैं। उसमें प्रकाशन अवधि के कुछ महत्वपूर्ण समाचारों को दिया जाता है पर उनका स्वरूप कुछ अलग होता है। उनमें तथ्य के साथ ही विचार भी होता है। उसमें समाचार विवरणात्मक होने की जगह व्याख्यात्मक होते हैं।

समाचार पत्रिकाओं जैसे इंडिया टूडे, आउटलुक आदि के पाठक सामान्य पाठक होते हैं इसलिए उनकी भाषा व लेखन शैली आमतौर पर समाचार पत्रों जैसी ही होती है। पर जो पत्रिकाएं किसी विशेष विषय पर आधारित होती हैं उनकी भाषा व शैली में विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। विज्ञान व तकनीक सम्बंधित पत्रिकाओं की भाषा आसान नहीं होती। ऐसी पत्रिकाओं के लिए लेखन में विषय का पूर्ण ज्ञान और उसकी तकनीकी शब्दावली का ज्ञान आवश्यक है।

समाचार पत्र लेखन की विशेषताएं

सरल व स्पष्ट भाषाः समाचार पत्रों के पाठक साधारण लोग होते हैं जिनमें कम शिक्षित लोग भी होते हैं। इसीलिए समाचार पत्रों की भाषा सरल और स्पष्ट होनी चाहिए। भाषा ऐसी होनी चाहिए जो उन लोगों की भी समझ में आ सके जो भाषा के विशेषज्ञ नहीं होते हैं।

तथ्यों को प्रमुखताः समाचार पत्रों में प्रतिदिन होने वाली घटनाओं के समाचार प्रमुख होते हैं इसलिए उसमें तथ्यों को प्रमुखता दी जाती है। समाचारों में जो कुछ हुआ है उसकी तथ्यात्मक जानकारी ही देनी होती है। समाचार विश्लेषण में पत्रकार अपने विचार दे सकता है पर समाचारों मे सिर्फ तथ्य ही दिये जाते हैं।

संक्षिप्तताः समाचार पत्र में दी जाने वाली सामग्री को यथासंभव संक्षिप्त रखना चाहिए। समाचार पत्र के पाठक कम शब्दों में पूरी जानकारी मिलने की अपेक्षा रखते हैं। पाठकों के पास समय की कमी होती है तथा वह कम समय में अधिक से अधिक समाचार पाना चाहते हैं इसलिए वह जितने संक्षिप्त होते हैं पाठकों को उतनी ही सुविधा होती है।

पूर्णताः समाचार पत्रों के लिए लिखते समय इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि जो भी खबर दी जा रही है वह पूर्ण हो। अधुरी खबर का पाठकों पर गलत प्रभाव पड़ता है। समाचार पत्र में दी जा रही सामग्री में किसी भी प्रकार से तथ्यों को छुपाना नहीं चाहिए।

 

पत्रिका लेखन की विशेषता

सरल व स्पष्ट पर विषयानुकूल भाषाः पत्रिका का चरित्र समाचार पत्र से अलग होता है। पत्रिका में विभिन्न विषयों पर व्याख्यात्मक शैली में वैचारिक लेखन होता है। इस तरह के लेखन की भाषा सरल व स्पष्ट होने के साथ ही विषयानुकूल भी होनी चाहिए। उदाहरण के लिए खेल की पत्रिका में खेलों की पारिभाषिक शब्दावलि का प्रयोग करना चाहिए भले ही वह कुछ पाठकों को आसान न लगे।

तथ्यों का विवेकपूर्ण प्रयोगः पत्रिका लेखन में तथ्यों का विवेकपूर्ण प्रयोग होना चाहिए। व्याख्यात्मक लेखन में तथ्यों की आवश्यकता होती है क्योंकि उनके आधार पर ही कोई निष्कर्ष निकाला जा सकता है। इसलिए तथ्यों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए और उनका सही तरीके से विश्लेषण करना चाहिए।

विचारों में तार्किकताः पत्रिका लेखन में विचारों की प्रधानता होती है परंतु विचार भी तथ्यों पर आधारित होते हैं। बिना तथ्यों का सही विश्लेषण किये लेखक किसी विचार को स्थापित नहीं कर सकता। विचारों में तार्किकता से आशय है कि लेखक जो भी विचार प्रस्तुत करता है उन्हें उचित प्रमाणित करने वाले तर्क व तथ्य साथ में दिये जाने चाहिएं।

विषय की सम्पूर्णताः पत्रिका लेखन में भी विषय की पूर्णता का ध्यान रखना आवश्यक होता है। पत्रिका के पाठक यह आशा करते हैं कि लेखक विषय के सभी पक्षों को सामने रखते हुए पाठक का मार्गदर्शन करेगा। प्रत्येक पाठक सभी विषयों की जानकारी नहीं रखता है इसलिए यह लेखक की जिम्मेदारी हो जाती है कि वह विषय को संपूर्णता में व्यक्त करे।

रोचकताः पत्रिका लेखन में रोचकता होनी चाहिए। समाचार पत्र सामान्यतः तथ्यों का प्रकाशन करते हैं। उनमें समाचार होते हैं जिनकी भाषा व लेखन शैली सामान्य होती है। इसके विपरीत पत्रिकाओं में विषय और भाषा-शैली में रोचकता की आवश्यकता होती है।

उपयोगिताः पत्रिकाओं में समाचारों की जगह वैचारिक लेखन होता है इसलिए लेखकों को यह साबित करना होता है कि जो कुछ वह लिख रहे हैं वह पाठकों के लिए उपयोगी है। पत्रिका के संपादक व उसके सहयोगियों को इस बात का ध्यार रखना होता है कि दी जा रही सामग्री सामयिक और उपयोगी हो।

आकर्षक प्रस्तुतिः पत्रिका में प्रस्तुति का विशेष महत्व है। समाचार पत्रों में भी पृष्ठ-सज्जा का महत्व होता है पर इसकी पत्रिका में अधिक आवश्यकता होती है। इसीलिए पत्रिकाओं में चित्रों, चार्ट आदि का अधिक प्रयोग किया जाता है। इसके साथ ही पृष्ठ-सज्जा को भी आकर्षक बनाया जाता है।

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